देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के निवारण के लिए संपादक को पत्र लिखिए।

सेवा में,

संपादक महोदय

दैनिक हिंदुस्तान,

नई दिल्ली।

दिनांक :- 10/06/20**

मान्यवर,

मैं आपके अखबार का नियमित पाठक हूं। ऐसे में मैं आपका ध्यान देश में बढ़ रहे भष्ट्राचार के मामलों की ओर आकर्षित करना चाहता हूं। क्योंकि आपके अखबार में जनता के मुद्दों को हमेशा प्राथमिकता के साथ उठाया जाता है। ऐसे में मुझे उम्मीद है कि आप मेरे द्वारा लिखे गए पत्र पर भी अपनी महत्वपूर्ण राय स्पष्ट करेंगे।

आज देश की दशा अत्यंत शोचनीय हो गई है। सर्वत्र अनाचार, भ्रष्टाचार, घूसखोरी और चोरबाजारी का बोलबाला हो रहा है। देशभक्ति के अभाव एवं सच्चरित्रता की कमी के कारण से बुराइयां हर जगह उत्पन्न हो रही हैं। साथ ही ऐसे लोग केवल अपने ही स्वार्थ के लिए और अपनी ही तिजोरियां भरने के लिए स्वतंत्रता और प्रजातंत्र का भी दुरुपयोग करते हैं। इसलिए मेरा मानना है कि देश के शत्रु ऐसे जमाखोरों, चोरबाजारी करने वालों, घूसखोरों और अनुचित लूट खसूट करने वालों को कड़े के कड़ा दंड दिया जाना चाहिए।

साथ ही देशवासियों का यह परम कर्तव्य है कि वे कानून की सहायता करने के लिए ऐसे दुष्ट व्यक्तियों का ब्यौरा देकर सरकार की सहायता करें। जिस पर सरकार का यह कर्तव्य होना चाहिए कि वे उपदेशों और व्याख्यानों द्वारा देशवासियों के चरित्र का निर्माण करें और चरित्रहीनों के बहिष्कार की सलाह दें।

इस प्रकार, हम सबका यह परम कर्तव्य है कि हम काले धन का पता लगाने में तत्परता दिखाए और भ्रष्टाचार निवारण के काम में सहयोग देने वाले दुष्चरित्र अधिकारियों को कठोरतम दंड दें। भ्रष्टाचार से छुटकारा पाने के पश्चात् ही स्वतंत्रता के वास्तविक आनंद का अनुभव होगा। मुझे भरोसा है कि मेरी बात को आपके अखबार में प्रमुखता से छापा जाएगा। जिसे पढ़कर अवश्य ही लोगों की सोच में फर्क आएगा।

प्रार्थी,

कमलेश

राजौरी गार्डन,

नई दिल्ली

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