पुस्तक और बाल पत्रिकाओं की आवश्यकता पर पत्र लिखिए।

पुस्तक भवन,
मेरठ, उत्तर प्रदेश।

महोदय,
निवेदन इस प्रकार है कि मैं आपके पुस्तक भवन में आकर नियमित तौर पर किताबों का अध्ययन करता हूं। जहां से मैं सदैव ही कुछ न कुछ अवश्य ही सीखकर जाता हूं। हालांकि आरंभ से ही मुझे हिंदी साहित्य और प्रेरणादायक कहानियां पढ़ने का शौक रहा है। साथ ही मैं महान् व्यक्तियों के बारे में पढ़कर स्वयं को काफी लाभान्वित महसूस करता हूं।

ऐसे में मैं आपका ध्यान इस बात की ओर आकर्षित करना चाहता हूं कि आधुनिक युवा पीढ़ी जोकि आज पूर्णतया तकनीक पर निर्भर हो गई है। वह किताबों को पढ़ने में अत्यधिक रुचि नहीं दिखाती है। वह हर प्रश्न के उत्तर या कुछ भी जानकारी प्राप्त करने के लिए इंटरनेट का सहारा लेती है। लेकिन मेरा मानना है कि यदि वह किताबों को पढ़ने की आदत डालती है, तो वह ना केवल उसके ज्ञान में वृद्धि करती है। अपितु उससे उसके भीतर संस्कारों का भी निर्माण होता है।

हमारी युवा पीढ़ी जिसके कंधों पर देश के भावी विकास की जिम्मेदारी है, उसे हमारे समाज के महान् व्यक्तियों के चरित्र और उनके द्वारा किए गए कार्यों को पढ़ना चाहिए। ताकि वह भी एक जिम्मेदार नागरिक बनकर देश के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वाह बेहतर तरीके से कर पाए। जिसके लिए उसे अलग-अलग विधाओं और विषयों पर लिखी गई किताबों का अध्ययन करना चाहिए।

साथ ही मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि आप पुस्तक भवन में छोटे-छोटे बच्चों के लिए भी बाल पत्रिकाओं की प्रतियां मंगवाए। ताकि छोटे-छोटे बच्चे भी उसमें लिखित प्रेरक कहानियों को पढ़कर अच्छी आदतों को अपनाएं और एक बेहतर कल की ओर अग्रसरित हो सकें।

इन्हीं अपेक्षाओं के साथ आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

प्रार्थी,
सरोज कुमार
अशोक नगर, मेरठ।

दिनांक:- 25/04/2021

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