अपने भाई को पत्र लिखकर अपनी यात्रा के बारे में बताइए।

ब्लॉक नंबर 2,
सूरज प्रताप कॉलोनी,
जमशेदपुर नगर,
झारखंड।

दिनांक…….

प्रिय भाई,
तेज प्रताप,
आपको सादर नमस्कार।

आशा करता हूं कि आप तथा घर के अन्य सदस्य सकुशल होंगे। आपको स्मरण होगा पिछले हफ्ते मैंने आपको एक पत्र लिखा था। जिसमें मैंने आपको बताया था कि मेरे विद्यालय की ओर से समस्त विद्यार्थियों को ऐतिहासिक ज्ञान टूर पर राजस्थान ले जाया जा रहा है। जोकि कुल 4 दिन की यात्रा है। आपने व माता पिता जी ने भी मुझे इस यात्रा पर जाने के लिए अनुमति प्रदान कर दी थी। गत दो दिन पहले ही मैं इस राजस्थान यात्रा से वापस विद्यालय के हॉस्टल पहुंचा हूं। उसके बाद कल थोड़ा आराम करने के बाद मैं आपको यह पत्र लिख रहा हूं।

भाई, मैं आपको बताना चाहूंगा कि राजस्थान यात्रा मेरे लिए कितनी अद्भुत रही। वैसे तो राजस्थान में बहुत सारे ऐतिहासिक स्थल मौजूद है। परन्तु विद्यालय की ओर से हमें कुछ विशेष स्थानों पर ही घूमाने के लिए ले जाया गया। जिसमें जयपुर का जंतर मंतर मुझे सबसे अद्भुत लगा। इसके अलावा हमने नौ मंजिला निर्मित विजय स्तम्भ को भी देखा। अध्यापक द्वारा बताया गया कि यह विजय स्तम्भ महाराणा कुम्भा ने अपनी विजय की खुशी में बनवाया था।


इसके साथ ही हमने पद्मिनी का महल, दो मंजिला बादल महल, बादी महल तथा शीश महल का भी आनंद लिया। इसके बाद अंत में राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा किला कुंभलगढ़ दुर्ग देखने के लिए हमें काफी लंबी यात्रा तय करनी पड़ी। हमारे अध्यापक ने बताया था कि यह किला प्रसिद्ध महाराजा राणा प्रताप का जन्मस्थान है तथा यह अरावली पर्वत की पहाड़ियों पर स्थित है। यह जानकर हम सभी की उत्सुकता और अधिक बढ़ गई।

इसी प्रकार हम मौज मस्ती करते हुए फिर अपने हॉस्टल वापस आ गए। सभी विद्यार्थी आनंदित थे। मुझे भी वहां जाकर बहुत अच्छा लगा। मैं आपका और माता पिता जी का धन्यवाद करना चाहूंगा जो आपने मुझे इस यात्रा पर जाने की अनुमति प्रदान की।

आपका स्नेही भाई,
गौरव।

अपने दोस्तों को share करे:

Leave a Comment